Shakti aur Kshama 2.0 - Bringing out the Lost Nuance
- jalansaab
- Dec 19, 2024
- 2 min read
Updated: Jan 23
Here's the context and a video explanation of my poem अन्ध-बिन्दु - शक्ति और क्षमा 2.0.
Ramdhari Singh Dinkar's famed Shakti aur Kshama has, despite its brevity, been one of the greatest modern works of veera rasa, which has inspired generations of readers. Its message how the opportune use of power and violence is Dharma-compliant has impressed many, based on its splendid combination of persuasive logic and poetic excellence.
A nuance within the Shakti-Kshama principle seems to have been lost on most of its admirers. It is this nuance that I try to expound on in this video.
The video has three parts explaining the following:
00:00 Dinkar's Shakti aur Kshama
23:57 The lost nuance
45:05 Shakti aur Kshama 2.0
I deeply feel that the poem will be of service to the reader and it is in this spirit alone that I present it here. I would be grateful to receive your feedback.
Other reference texts:
1. Poem: अन्ध-बिन्दु - शक्ति और क्षमा 2.0
2. Essay: Shakti aur Kshama - and the Lost Nuance
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रामधारी सिंह 'दिनकर' की सुप्रसिद्ध कविता शक्ति और क्षमा, अत्यंत लघु होने के उपरांत भी, आधुनिक युग में वीररस की अतिउत्कृष्ट रचनाओं में एक है, जिसने कई पीढ़ियों को प्रेरित किया है। कविता का मुख्य संदेश - शक्ति का सामयिक प्रयोग धर्मसम्मत है - पाठकों पर एक गहन प्रभाव छोड़ता है, जो इसके अतुल्य काव्य-शक्ति एवं सशक्त तर्क के अद्भुत योग की देन है।
इस क्षमा-शक्ति सिद्धांत का एक सूक्ष्म भेद है जो बहुधा अनदेखा रह जाता है। इसी लुप्त भेद को एक नई कविता में मैंने प्रतिपादित करने का प्रयास किया है।
इस चलचित्र के तीन भाग हैं:
00:00 दिनकर की कविता: शक्ति और क्षमा
23:57 एक सूक्ष्म परंतु अतिमहत्त्वपूर्ण भेद
45:05 शक्ति और क्षमा 2.0
मेरा प्रबल विश्वास है कि मेरी कविता श्रोताओं/पाठकों की सेवा में सक्षम होगी, और इसे केवल सेवा की ही दृष्टि से यहाँ प्रस्तुत किया जा रहा है। कविता पर आपकी राय अति सहायक होगी।
सन्दर्भ:
1. कविता: अन्ध-बिन्दु - शक्ति और क्षमा 2.0
2. प्रस्ताव: Shakti aur Kshama - and the Lost Nuance
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